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प्राइवेट सेक्टर की कंपनी स्काईमेट वेदर सर्विसेज के एक दिन बाद भारतीय मौसम विभाग का कहना है इस साल मॉनसून की पहली बारिश 18-19 मई तक अंडमान में होने की उम्मीद है. वहीं, केरल में यह 6 जून को दस्तक दे सकता है. आमतौर पर यह मई के आखिरी हफ्ते यानी 30 मई तक पहुंच जाता है. लेकिन इस बार ये 5 दिन लेट हो सकता है. आपको बता दें कि मंगलवार को स्काईमेट के पूर्वानुमानों के मुताबिक, इस साल मॉनसून पर अलनीनो का असर पड़ सकता है. इस साल मॉनसून सामान्य का 93 फीसदी रह सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 4 जून को केरल पहुंच सकता है. इससे पहले 22 मई को मॉनसून अंडमान निकोबार पहुंचेगा.

6 जून को केरल पहुंचेगा मॉनसून- भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि इस साल मॉनसून 18-19 मई को केरल पहुंच सकता है. वहीं, ये 6 जून को केरल पहुंचेगा. इससे पहले भारत के मौसम विभाग (IMD) ने कहा था कि अल नीनो की स्थिति कमजोर बनी हुई है. इसके आगे बढ़ने की संभावना बहुत कम नज़र आ रही है. अगले कुछ महीनों में ये और कमजोर हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो देश के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है, क्योंकि मॉनसूनी बारिश का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. 



क्या कहां है स्काईमेट ने- स्काईमेट के मुताबिक, इस साल बंगाल, बिहार, झारखंड में बारिश कम होगी. पूर्वी भारत में सामान्य सामान्य के मुकाबले 92 फीसदी बारिश होने का अनुमान है. राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब में अच्छी बारिश के अनुमान जताए जा रहे हैं. मध्यभारत में मॉनसून सामान्य से 50 फीसदी कम रह सकता है.

अर्थव्यवस्था पर मॉनसून का असर- मॉनसून का सीधा असर ग्रामीण आबादी पर पड़ता है. मॉनसून सामान्य और अच्छा रहने से ग्रामीण इलाकों में लोगों की आय बढ़ती है, जिससे मांग में भी तेजी आती है. ग्रामीण इलाकों में आय बढ़ने से इंडस्ट्री को भी फायदा मिलता है. वहीं, कमजोर रहने पर इसका उलटा असर होता है.

1951-2000 की बात करें तो देश में बारिश का लॉन्ग पीरियड एवरेज 89cm रहा है. इससे पहले मौसम के बारे में जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट का अनुमान दिया है कि जून से सितंबर के दौरान सीजन में सामान्य की 93 फीसदी बारिश होगी. हालांकि एजेंसियां यह मानकर चलती हैं कि इसमें थोड़ा बहुत बदलाव आ सकता है. 5 फीसदी ज्यादा या कम हो सकता है