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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है. यूएनएससी की अध्यक्ष जोआना रोनक्का ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव पर अपनी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया है. यूएन ने साथ ही पाकिस्तान को 1972 शिमला समझौते का रास्ता भी दिखाया है.

बता दें कि जम्मू और कश्मीर मामले को लेकर पाकिस्तान ने यूएनएससी को खत लिखकर दखल देने की मांग की थी. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को जम्मू और कश्मीर में मौजूदा स्थिति पर अधिकतम संयम बरतने की अपील की. यहां तक ​​कि सयुंक्त राष्ट्र जम्मू और कश्मीर के हालात पर नजर बनाया हुआ है, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कश्मीर के समाधान के लिए पाकिस्तान को द्विपक्षीय शिमला समझौते का निर्देश दिया. 

यूएन में पाकिस्तान के दूत मलीहा लोधी ने मामले में यूएन से हस्तक्षेप की मांग की थी. मलीहा लोधी ने कहा कि मैंने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश के चीफ स्टाफ मारिया लुईसा रिबेरो वियोटी से मुलाकात की. उनके सामने कश्मीर पर भारत के फैसले के बारे में जानकारी दी और कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का अनुपालन कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र को दखल देना चाहिए.

यूएन महासचिव की प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने एक बयान में कहा कि महासचिव भारत और पाकिस्तान के बीच द्धिपक्षीय संबंधों को लेकर 1972 के समझौते का याद करते हैं, जिसे शिमला समझौता भी कहा जाता है. इसमें कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए.