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बूंदी. राजस्थान के गांधीसागर बांध (Gandhisagar Dam) से भारी मात्रा में पानी (Water) छोड़ा जा रहा है. इसके चलते चंबल नदी (Chambal River) अपने उफान पर है.  केशवरायपाटन कस्बे की बस्तियों सहित नदी किनारे बसे दर्जन भर गांव जलमग्न (Villages Inundated) हो गए हैं. ऐसे में सड़कें दरिया (Roads Submerged) बन गई हैं और कई गांवों ने टापू का रूप ले लिया है. यहां चार-चार फीट तक पानी भर गया है. लोगों के घरों में पानी के घुसने से घरेलू सामान बर्बाद हो रहे हैं. इसके चलते खाने-पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है. ऐसे में लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है.
चंबल नदी अपने उफान पर

बचाव दल (Rescue Team) रोटेदा, डोलर और पापड़ी गांव में पानी के बीच फंसे सैकड़ों लोगों को रेस्क्यू करने में जुटा हुआ है, लेकिन चंबल नदी में तेज बहाव के चलते उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. रविवार की देर शाम तक डोलर गांव में फंसे सिर्फ 8 लोगों को ही बाहर निकाला जा सका है. वहीं रोटेदा और पापड़ी में फंसे लोगों को निकालने का कार्य जारी है. नगरपालिका प्रशासन (Municipal Administration) द्वारा प्रभावित क्षेत्र में घर घर भोजन के पैकैट वितरित करने की बजाय श्रीराम धर्मशाला में राहत शिविर के नाम पर लोगों को खाना खिलाया जा रहा है.
 

बाढ़ पीड़ित बासी खाना खाने को मजबूर

पानी से घिरे क्षेत्र के एक दर्जन गांवों में प्रशासन द्वारा व्यवस्था का जिम्मा सरपंचों पर छोड़ दिया गया है. यहां राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ितों के लिए गर्म खाना बनवाने की बजाय अन्नपूर्णा रसोई (Annapurna Kitchen) के वैन को गांव में बुलाया गया. ऐसे में बाढ़ पीड़ितों को वैन का ठंडा और बासी खाना खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. रोटेदा सरपंच पति प्रदीप नंदवाना प्रभावित लोगों के लिए मंगवाए गए अन्नपूर्णा रसोई के खाने को अच्छा बता रहे हैं. हालांकि अब लोगों की शिकायत पर वह राहत शिविरों में ही खाना बनवाने की भी बात कह रहे हैं.
 

सड़कें दरिया बन गई हैं और कई गांवों ने टापू का रूप ले लिया है.

फसलों के नुकसान का मिले मुआवजा

केशवरायपाटन कस्बे और नदी किनारे के एक दर्जन गांवों में हुई तबाही की बात को स्वीकार कर रहे कांग्रेसी नेता ने बाढ़ में फंसे लोगों को सकुशल बाहर निकालने के लिए एसडीएम को निर्देश दे दिए हैं. इसके साथ ही क्षेत्र में बाढ़ से मकानों और फसलों को हुए नुकसान का आकलन करवा कर पीड़ित लोगों को उचित मुआवजा (Compensation) दिलाने का विश्वास भी दे रहे हैं.