रामलीला मैदान विवाद: केजरीवाल बोले- PM का नाम अटल रख दें तब वोट मिलेंगे

Aug 25,2018, 14:08 PM

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से बदलने को लेकर विवाद हो गया है। अरविंद केजरीवाल द्वारा विरोध जताए जाने के बाद भाजपा भी यूटर्न लेती नजर आ रही है।

सबसे पहले उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर आदेश गुप्ता ने बताया कि रामलीला मैदान में अटल जी ने कई जनसभाओं को संबोधित किया था। इसलिए उनकी याद में रामलीला मैदान का नाम अब अटल बिहारी वाजपेयी रामलीला मैदान रखने का फैसला किया गया है। शनिवार सुबह प्रस्ताव पेश भी कर दिया गया।

इस बीच, आम आदमी पार्टी इसके खिलाफ खड़ी हो गई है। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर विरोध किया है। केजरीवाल ने अपने ट्वीट में लिखा है - रामलीला मैदान इत्यादि के नाम बदलकर अटल जी के नाम पर रखने से वोट नहीं मिलेंगे, भाजपा को प्रधान मंत्री जी का नाम बदल देना चाहिए। तब शायद कुछ वोट मिल जायें। क्योंकि अब उनके अपने नाम पर तो लोग वोट नहीं दे रहे।

इसके बाद दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी सामने आए और बताया कि रामलीला मैदान का नाम बदलने का उनका कोई प्रस्ताव नहीं है। यह भ्रम आम आदमी पार्टी फैला रही है। बकौल मनोज तिवारी, राम हमारे आराध्य देव हैं, इसलिए रामलीला मैदान का नाम बदलने का सवाल ही नहीं।

ब्रिटिश काल में रामलीला मैदान एक बड़ा तालाब था, जो अजमेरी गेट तक फैला था। बाद में मिट्टी डालकर इसे समतल किया गया। सरकारों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से इसके कुछ हिस्सों में विकास कार्य कराया। दिल्ली की बड़ी कूलर मार्केट में शुमार कमला मार्केट भी इसका हिस्सा थी। चूंकि यहां रामलीला का आयोजन होने लगा तो इसका नाम रामलीला मैदान पड़ गया।

रामलीला मैदान कई राजनीतिक घटनाओं का भी गवाह रहा है। वर्ष 2013 में जब पहली बार आम आदमी पार्टी (आप) की दिल्ली में सरकार बनी थी तो अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री और उनके कुछ विधायकों ने मंत्री पद की यहीं शपथ ली थी। हालांकि, यह सरकार 49 दिन ही चल सकी थी। वर्ष 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतकर जब 'आप' ने दोबारा सत्ता हासिल की तो केजरीवाल ने फिर से यहीं अपना शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया था।

योगगुरु बाबा रामदेव द्वारा वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ किया गया आंदोलन हो या समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा लोकपाल के लिए भरी गई हुंकार, दोनों बड़े आंदोलनों का रामलीला मैदान गवाह रहा है। रामदेव के आंदोलन के समय पुलिस ने 5 जून 2011 की रात को लाठीचार्ज कर दिया था, जिसमें कई आंदोलनकारी घायल हो गए थे। वहीं, अन्ना के आंदोलन ने अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम को नई पहचान दी थी।

1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर सत्याग्रह यहीं से शुरू किया था। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1956 और 57 में रामलीला मैदान में विशाल जनसभाएं की थीं। इसके अलावा लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने इसी मैदान से कांग्रेस सरकार के खिलाफ हुंकार भरी थी।

जहां रामलीला मैदान है, वहां वर्ष 1930 से पहले तालाब था। वर्ष 1930 में इसे भरकर मैदान बनाया गया ताकि रामलीला का आयोजन हो सके। इससे पहले रामलीला लाल किले के पीछे होती थी। यमुना में बाढ़ आने के कारण इस पर असर पड़ता था। रामलीला आयोजन समिति ने स्थानीय प्रशासन से रामलीला के आयोजन के लिए जगह देने का आग्रह किया। इसके बाद प्रशासन ने शहर के बीचों-बीच रामलीला के लिए आयोजन के लिए जगह का चयन किया।

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