जानें, असल में क्या था सरदार वल्लभभाई पटेल का कद

Oct 31,2018, 13:10 PM

सरदार पटेल की प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ने दुनियाभर की ऊंची और आलीशान मूर्तियों को पीछे छोड़ दिया है. लेकिन क्या आप जानते हैं पटेल का कद कितना था! साढ़े पांच फीट. अपने वक्त की तिगड़ी में प्रमुख महात्मा गांधी का कद पांच फीट- चार इंच था, वहीं जवाहरलाल नेहरू की ऊंचाई पांच फीट- दस इंच थी यानी तीनों में सबसे ज्यादा थी. हालांकि भारतीय मानकों के हिसाब से पुरुषों के औसत कद को ठीक छूते हुए कद के 'आयरन मैन' के चेहरे-मोहरे और भंगिमाओं बारे में कई ऐसे तथ्य हैं जो उन्हें समकालीन लोगों के साथ रखकर भी उनसे अलग बनाते हैं.

गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर को जन्मे पटेल पढ़ने-लिखने में औसत हुआ करते लेकिन खेल-कूद में उनकी खासी रुचि थी. पेड़ों पर चढ़ना-उतरना, दौड़-भाग जैसे खेलों में साथी मुश्किल से ही उनका हाथ पकड़ पाते थे. उनके पसंदीदा खेलों में गिल्ली डंडा, हुतूतू, खो-खो और वांस पीपली यानी पेड़ों पर लुका-छिपी का खेल था.

गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर को जन्मे पटेल पढ़ने-लिखने में औसत हुआ करते लेकिन खेल-कूद में उनकी खासी रुचि थी. पेड़ों पर चढ़ना-उतरना, दौड़-भाग जैसे खेलों में साथी मुश्किल से ही उनका हाथ पकड़ पाते थे. उनके पसंदीदा खेलों में गिल्ली डंडा, हुतूतू, खो-खो और वांस पीपली यानी पेड़ों पर लुका-छिपी का खेल था.

गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर को जन्मे पटेल पढ़ने-लिखने में औसत हुआ करते लेकिन खेल-कूद में उनकी खासी रुचि थी. पेड़ों पर चढ़ना-उतरना, दौड़-भाग जैसे खेलों में साथी मुश्किल से ही उनका हाथ पकड़ पाते थे. उनके पसंदीदा खेलों में गिल्ली डंडा, हुतूतू, खो-खो और वांस पीपली यानी पेड़ों पर लुका-छिपी का खेल था.

सरदार पटेल का रंग औसत से काफी दबा हुआ था. उनके सिर के बाल उम्र से पहले झड़ने लगे, इस वजह से उनका पहले से ही चौड़ा माथा और भी चौड़ा नजर आता था. उनकी कई आदतों पर आंचलिक असर साफ दिखता था. शुरुआत में स्थानीय लोगों की तरह वे भी मूंछें रखा करते जो थोड़ी पतली और नीचे की ओर झुकी हुई होती. सरदार पटेल का रंग औसत से काफी दबा हुआ था. उनके सिर के बाल उम्र से पहले झड़ने लगे, इस वजह से उनका पहले से ही चौड़ा माथा और भी चौड़ा नजर आता था. उनकी कई आदतों पर आंचलिक असर साफ दिखता था. शुरुआत में स्थानीय लोगों की तरह वे भी मूंछें रखा करते जो थोड़ी पतली और नीचे की ओर झुकी हुई होती.

सरदार पटेल का रंग औसत से काफी दबा हुआ था. उनके सिर के बाल उम्र से पहले झड़ने लगे, इस वजह से उनका पहले से ही चौड़ा माथा और भी चौड़ा नजर आता था. उनकी कई आदतों पर आंचलिक असर साफ दिखता था. शुरुआत में स्थानीय लोगों की तरह वे भी मूंछें रखा करते जो थोड़ी पतली और नीचे की ओर झुकी हुई होती.

पटेल-नेहरू संबंध हमेशा चर्चा में रहे और कई बार इनका मतभेद भी खुलकर सामने आया. साल 1947 बैच के आईएएस अफसर एमकेके नायर ने अपने संस्मरण 'विद नो इल फीलिंग टू एनीबडी' में लिखा था- एक नोकझोंक के दौरान नेहरू ने पटेल को सांप्रदायिक कहा. पटेल बिना कुछ कहे तमतमाते हुए मीटिंग से निकल गए. उसके बाद से दोनों के बीच संबंध कभी सामान्य नहीं हो सके. पटेल-नेहरू संबंध हमेशा चर्चा में रहे और कई बार इनका मतभेद भी खुलकर सामने आया. साल 1947 बैच के आईएएस अफसर एमकेके नायर ने अपने संस्मरण 'विद नो इल फीलिंग टू एनीबडी' में लिखा था- एक नोकझोंक के दौरान नेहरू ने पटेल को सांप्रदायिक कहा. पटेल बिना कुछ कहे तमतमाते हुए मीटिंग से निकल गए. उसके बाद से दोनों के बीच संबंध कभी सामान्य नहीं हो सके.

पटेल-नेहरू संबंध हमेशा चर्चा में रहे और कई बार इनका मतभेद भी खुलकर सामने आया. साल 1947 बैच के आईएएस अफसर एमकेके नायर ने अपने संस्मरण 'विद नो इल फीलिंग टू एनीबडी' में लिखा था- एक नोकझोंक के दौरान नेहरू ने पटेल को सांप्रदायिक कहा. पटेल बिना कुछ कहे तमतमाते हुए मीटिंग से निकल गए. उसके बाद से दोनों के बीच संबंध कभी सामान्य नहीं हो सके. देश के पहले गृहमंत्री और पहले उप-प्रधानमंत्री की शुरुआती शिक्षा अपेक्षाकृत 'कमजोर' रही. उन्होंने 22 साल की उम्र में दसवीं पास की. हालांकि 36 साल की उम्र में अपनी विलक्षणता का परिचय देते हुए सरदार ने लंदन के मिडिल टेंपल इन में बैरिस्टरी का 36 महीने का कोर्स महज 30 महीने में पूरा कर लिया.  देश के पहले गृहमंत्री और पहले उप-प्रधानमंत्री की शुरुआती शिक्षा अपेक्षाकृत 'कमजोर' रही. उन्होंने 22 साल की उम्र में दसवीं पास की. हालांकि 36 साल की उम्र में अपनी विलक्षणता का परिचय देते हुए सरदार ने लंदन के मिडिल टेंपल इन में बैरिस्टरी का 36 महीने का कोर्स महज 30 महीने में पूरा कर लिया. देश के पहले गृहमंत्री और पहले उप-प्रधानमंत्री की शुरुआती शिक्षा अपेक्षाकृत 'कमजोर' रही. उन्होंने 22 साल की उम्र में दसवीं पास की. हालांकि 36 साल की उम्र में अपनी विलक्षणता का परिचय देते हुए सरदार ने लंदन के मिडिल टेंपल इन में बैरिस्टरी का 36 महीने का कोर्स महज 30 महीने में पूरा कर लिया. सरदार सौंदर्य की परिपाटी पर खरे बैठते थे या नहीं, इसपर राय अलग हो सकती है लेकिन इसपर कोई दो-मत नहीं कि गंभीर भाव-भंगिमाओं, सीधी-सादी लेकिन भेदने वाली आंखों और शायद ही कभी झलकने वाली मुस्कान से पटेल का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली लगता था, यहां तक कि इसका लाभ भी उन्हें पेशे की शुरुआत में मिला, जब लोग उनसे बात करते हुए हकलाने लगते.  सरदार सौंदर्य की परिपाटी पर खरे बैठते थे या नहीं, इसपर राय अलग हो सकती है लेकिन इसपर कोई दो-मत नहीं कि गंभीर भाव-भंगिमाओं, सीधी-सादी लेकिन भेदने वाली आंखों और शायद ही कभी झलकने वाली मुस्कान से पटेल का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली लगता था, यहां तक कि इसका लाभ भी उन्हें पेशे की शुरुआत में मिला, जब लोग उनसे बात करते हुए हकलाने लगते सरदार सौंदर्य की परिपाटी पर खरे बैठते थे या नहीं, इसपर राय अलग हो सकती है लेकिन इसपर कोई दो-मत नहीं कि गंभीर भाव-भंगिमाओं, सीधी-सादी लेकिन भेदने वाली आंखों और शायद ही कभी झलकने वाली मुस्कान से पटेल का व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली लगता था, यहां तक कि इसका लाभ भी उन्हें पेशे की शुरुआत में मिला, जब लोग उनसे बात करते हुए हकलाने लगते. देश का लौह पुरुष कहलाने वाला ये शख्स भाई-भतीजावाद के सख्त खिलाफ था. इस बात का खूब जिक्र मिलता है कि कैसे उन्होंने अपने बेटे दहयाभाई से दिल्ली से तब तक यथासंभव दूर रहने को कहा था जब तक वो दिल्ली में रहें.  देश का लौह पुरुष कहलाने वाला ये शख्स भाई-भतीजावाद के सख्त खिलाफ था. इस बात का खूब जिक्र मिलता है कि कैसे उन्होंने अपने बेटे दहयाभाई से दिल्ली से तब तक यथासंभव दूर रहने को कहा था जब तक वो दिल्ली में रहें. देश का लौह पुरुष कहलाने वाला ये शख्स भाई-भतीजावाद के सख्त खिलाफ था. इस बात का खूब जिक्र मिलता है कि कैसे उन्होंने अपने बेटे दहयाभाई से दिल्ली से तब तक यथासंभव दूर रहने को कहा था जब तक वो दिल्ली में रहें. चौड़ी और दृढ़ ठोड़ी और फैले हुए नथुनों की वजह से पटेल किसी तस्वीर की तरह खूबसूरत और प्रभावशाली नजर आते. जैसा कि लगभग 50 सालों बाद स्टेट्समैन के तत्कालीन संपादक इयान स्टेफंस ने सरदार पटेल की प्रोफ़ाइल पर बात करते हुए उसे 'एक्सेप्शनली हैंडसम' बताया था.  चौड़ी और दृढ़ ठोड़ी और फैले हुए नथुनों की वजह से पटेल किसी तस्वीर की तरह खूबसूरत और प्रभावशाली नजर आते. जैसा कि लगभग 50 सालों बाद स्टेट्समैन के तत्कालीन संपादक इयान स्टेफंस ने सरदार पटेल की प्रोफ़ाइल पर बात करते हुए उसे 'एक्सेप्शनली हैंडसम' बताया था. चौड़ी और दृढ़ ठोड़ी और फैले हुए नथुनों की वजह से पटेल किसी तस्वीर की तरह खूबसूरत और प्रभावशाली नजर आते. जैसा कि लगभग 50 सालों बाद स्टेट्समैन के तत्कालीन संपादक इयान स्टेफंस ने सरदार पटेल की प्रोफ़ाइल पर बात करते हुए उसे 'एक्सेप्शनली हैंडसम' बताया था. नाडियाड में पटेल के कपड़ों पर स्थानीय छाप थी. वे पूरी आस्तीन की कमीज पहनते, जिसमें कलाई पर बटनहोल होता. साथ में एक कैप लगाया करते, जिसका किनारा ज़री के काम वाला होता. बाद में वकालत की पढ़ाई के दौरान कपड़ों की पसंद बदली और आंचलिक छाप कम होती चली गई.  नाडियाड में पटेल के कपड़ों पर स्थानीय छाप थी. वे पूरी आस्तीन की कमीज पहनते, जिसमें कलाई पर बटनहोल होता. साथ में एक कैप लगाया करते, जिसका किनारा ज़री के काम वाला होता. बाद में वकालत की पढ़ाई के दौरान कपड़ों की पसंद बदली और आंचलिक छाप कम होती चली गई.

नाडियाड में पटेल के कपड़ों पर स्थानीय छाप थी. वे पूरी आस्तीन की कमीज पहनते, जिसमें कलाई पर बटनहोल होता. साथ में एक कैप लगाया करते, जिसका किनारा ज़री के काम वाला होता. बाद में वकालत की पढ़ाई के दौरान कपड़ों की पसंद बदली और आंचलिक छाप कम होती चली गई.

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