दीपावली 2018: इन तीन उपायों से घर में विराजेंगी स्थायी लक्ष्मी, जरूर पढ़ें

Nov 03,2018, 12:11 PM

दीपावली पर अक्सर आपने बड़े बुजुर्गों को कहते हुए सुना होगा कि रात भर जागना चाहिए। कहते हैं कि दिवाली की रात में मां लक्ष्मी हर घर में आती हैं। आजकल लोग रात-भर जागने के लिए ताश के पत्ते खेलते हैं। मगर, इससे घर में आने वाली लक्ष्मी क्या आपके घर में ठहरेंगी? यह अहम सवाल है क्योंकि हम लोगों ने आधी बात को ही आत्मसात किया है। इंदौर के ज्योतिषविद आलोक खंडेलवाल बताते हैं कि दिवाली की रात में जागते हुए श्रीसूक्त का पाठ किया जाता है। इससे धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और चिर स्थायी होकर ठहरती हैं। श्रीसूक्त का वर्णन ऋग्वेद में मिलता है। श्रीसूक्त में सोलह मंत्र हैं। यदि आप इनका पाठ संस्कृत में नहीं कर सकते हैं, तो हिंदी में उसका अनुवाद बोलकर भी लाभ ले सकते हैं, बशर्ते मन में धारणा और विश्वास होना चाहिए।

वृष लग्न में करें पूजन-

दीपावली धन और समृद्धि का त्योहार है। हर व्यक्ति मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने और धन प्राप्त करने के उपाय करता है। एस्ट्रोलोक के फाउंडर आलोक खंडेलवाल कहते हैं कि स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए स्थिर लग्न वृष में पूजन करना चाहिए, जो प्रायः गोधूलि की वेला में होता है। इसके अलावा स्थिर लग्न सिंह, वृश्चिक और कुंभ हैं। मगर वृष लग्न में पूजन करना इसलिए ज्यादा श्रेष्ठ है क्योंकि यह भूमि तत्व का है और इसके देवता शुक्र होते हैं, जो भौतिक सुखों के स्वामी हैं।

अष्टलक्ष्मी का करें पूजन-

उन्होंने बताया कि प्रायः सभी घरों में पूजा की तैयारी होती है, पूजा नहीं होती है। दिवाली की रात में लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने के लिए श्री सूक्त, कनकधारा स्रोत आदि का पाठ करना अहम होता है। दक्षिण भारत में दिवाली की रात में हवन कर मां लक्ष्मी के निमित्त लाई गई सामग्री को चढ़ाया जाता है। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। ज्यादातर लोग सिर्फ धन लक्ष्मी का ही पूजन करते हैं, जबकि उन्हें अष्टलक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। शास्त्र के ज्ञाताओं ने लक्ष्मी के आठ रूपों का वर्णन किया है जिनमें आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी प्रसिद्ध हैं।

भगवान विष्णु और गणेश की करें आराधना-

इसके साथ ही दीपावली के दिन प्रात: भगवान विष्णु का स्मरण करें क्योंकि जहां नारायण हैं, वहीं श्रीलक्ष्मी भी होंगी। श्री गणपति की स्थापना होने पर लक्ष्मी की पूर्ण स्थापना होती है। बिना गणपति के लक्ष्मी साधना अधूरी रहती है। आलोक खंडेलवाल बताते हैं कि इस दिन पटाखे चलाने की भी परंपरा है, जिसका दर्शन यह है कि जब व्यक्ति बाहर शोर करता है, बाहर के शोर को सुनता है, तो उसके मन का शोर शांत होता है और वह ध्यान की दिशा में आगे बढ़ता है।

 

 

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