भीलवाड़ा. जिले में प्रचलित बाल विवाह ने आखिर एक महिला की जिंदगी को नारकीय जीवन बना दिया, महिला पर इतना अत्याचार होने के बावजूद भी पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है. एक कहावत है आसमान से गिरे खजूर पर अटके यह कहावत चरितार्थ हो रही है. भीलवाड़ा जिले के करेड़ा थाना क्षैत्र में रहने वाली दिव्‍यांग महिला लादी देवी वैष्‍णव पर भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बरामदे में न्याय की गुहार के लिए हाथों के बल धीरे-धीरे रेंगती लादी देवी अपनी किस्मेत को भी कोष रही है. इसका बस दोष इतना ही है कि इसके अभी कोई संतान नहीं है और पति ने अपनी मां के साथ मिलकर महिला लादी को प्रताड़ना दे देकर घर से बाहर निकाल दिया.

अब यह बिना विद्युत और जल कनेक्शन वाले आंगनबाड़ी केंद्र में चालीस दिनो से शरण लिए हुए. किस्मुत को इतने पर भी सब्र नहीं आया जब यह न्याय पाने के लिए करेड़ा पुलिस स्टेशन और शिवपुर पुलिस चौकी गई तो वहाँ मौजूद पुलिसकर्मी ने यह कह दिया कि वह नहीं रखना चाहता है तो तुम तलाक क्यों नहीं ले लेती हो. दिव्यांग महिला लादी वैष्णव पर तो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा , भीलवाड़ा जिले के पोपा की कमेरी गांव की इस दिव्यांग महिला का 16 वर्ष की नाबालिग आयु में बाल विवाह किया जाता है , और यह इसी उम्र में विधवा भी हो जाती है.

साल 2003 में मांडल तहसील के रूपपुरा ग्राम के रहने वाले ने बजरंग दास वैष्णव ने इससे पुनर्विवाह किया तो इसे जीवन में एक नई खुशी की उम्मीद जगी. इनकी गृहस्थी की गाड़ी ठीक चल रही थी. इसके एक नहीं दो -दो बार सिजेरियन ऑपरेशन से डिलीवरी हुई पर बच्चे जिंदा ना रह सके. तब से इस पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. इसके बाद पति और सास दोनों ने मिलकर लादी पर जुल्मों का कहर ढहाना शुरू कर दिया. जैसे तैसे साल 2009 में लादी वैष्णव ने अपने पैरों पर खड़ा होने का निश्चय किया और आंगनवाड़ी में आशा सहयोगिनी के रूप में काम करते हुए छोटी-छोटी बचत से एक लोहे के टीन से छपरे नुमा आशियाना बनाकर रहने का जुगाड़ तो कर लिया. मगर एक महीने पहले पति और सास ने मारपीट कर इसके द्वारा बनाए गए आशियाने से बेदखल कर इसे घर से बाहर निकाल दिया , अब यह गांव के आंगनवाड़ी केंद्र में जिसमें न तो विद्युत और नहीं जल कनेक्शन है फिर भी जैसे तैसे शरण लिए हुए हैं. अपने दुखो को बयां करते हुए लादी वैष्‍णव फफक फफक कर रोते हुवे कहती हैं , कि मेरा पति बार-बार कहता कि तू हमें संतान नहीं दे सकती हमारा वंश आगे नहीं बढ़ा सकता. अब तेरी इस घर में कोई जरूरत नहीं है , मैं जब थाने में गयी तो वहां पर पुलिसकर्मी भी बोलते है कि वह जब तुझे नहीं रखना चाहता है तो उससे तलाक ले लें.

मेरी 40 साल की उम्र हो गयी ऐसे में अब कहां पर जाऊं. मैं दिव्यांग होने की वजह से पानी भी नहीं भर कर ला सकती. जैसे तैसे किसी से मदद की गुहार लगाती हूं तो मेरी सास उससे भी झगड़ा करती है. इसी डर से कोई भी मेरी मदद के लिए आगे नहीं आता है.

सखी सेन्टंर की प्रभारी गरिमा सिंह ने कहा कि हमने करेडा़ थाने में भी रिपोर्ट दर्ज करवायी लेकिन कार्यवाही नहीं की तो हमने पुलिस अधीक्षक के समक्ष लादी देवी को ले गये. इस पर उन्होने करेड़ा थाना प्रभारी को त्वेरित मुकद्दमा दर्ज करके कार्यवाही करने के निर्देश दिये. वहीं करेड़ा थाना प्रभारी सुरेन्द्र गोधरा ने कहा कि हमने कई बार इनके बीच समझाइस की है लेकिन हम यह जानकारी नहीं है. कि उसे घर से बाहर निकाल दिया. हमने मुकद्दमा दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्यवाही की जायेगी.