गजसिंहपुर.  23 जून को शाहजहांपुर के लिए किसानों का बड़ा जत्था रवाना को लेकर ग्रामीण किसान मजदूर समिति गाँव-गाँव में तूफानी रफ्तार से ग्रामीण के किसानों से जनसम्पर्क कर रही है,यहाँ किसान पूरी एकता के साथ शाहजहांपुर चलने का संकल्प लिया लिया जा रहा है, पूरी ताकत के साथ शाहजहांपुर के लिए किसान कूच करने को लेकर कवायद तेज़ कर दी गई है, 200 से 300 वाहनों का काफ़िला कूच करेंगा,हरियाणा और यूपी के किसानों के साथ संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 24 जून को श्री गंगानगर और हनुमानगढ के किसानों का काफिला शाहजहांपुर बॉर्डर पर कबीर जयंती मनाएगा

बता दे की किसानों को 23 जून यानी कल शाहजहांपुर जाने से पहले श्रीगंगानगर के गंगासिंह चौक पर बड़ी तादात में किसान एकत्रित होंगे और जिला कलेक्टर के समक्ष गंगनहर में आ रहे जहरीले पानी को लेकर रोष प्रकट करेंगे

आपकों बता दें कि GKS गाँव-गाँव ढाणी- ढाणी जा कर किसानों के साथ तीनों काले कानूनों के विरोध के साथ-साथ गंगनहर में शेयर से कम पानी ,फसलों की एमएसपी पर खरीद कानून सम्बंधित चर्चा की जा रही है,बङी तादात के साथ शाहजहांपुर कूच लेकर यहाँ   संकल्प लिया जा रहा है साथ ही राजनीतिक दलों के नेताओं को ग़ांव में घुसने पर विरोध किया  जाए इसे लेकर भी गाँव के किसानों से अपील की जा रही है

आपकों बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा 3 कृषि कानून के खिलाफ  पंजाब, हरियाणा और पश्चिम यूपी के किसान पिछले 8 महीने से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन जारी है,सरकार और आंदोलनकारी किसानों बीच अब तक 11 बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन किसान तीनों कानूनों को रद्द किए बिना आंदोलन वापस घर लौटने को राज़ी नहीं,बता दें कि 26 जनवरी के दिन लाल किला हिंसा के बाद आंदोलनकारी किसानों और सरकार बीच बातचीत बंद है,दोनों पक्षों के बीच आखिरी बार बातचीत 22 जनवरी को हुई थी, लाल किला हिंसा के बाद से सरकार ने अपना रुख कड़ा कर रखा,5 महीनों की चुप्पी के बाद केंद्र सरकार ने एक बार फिर आंदोलनकारी किसानों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है,केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्विट कहा है की हम किसानों से आधी रात को भी बात करने को तैयार है,कृषि मंत्री का कहना है- ‘कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को छोड़कर सरकार कृषि  कानूनों के किसी भी प्रावधान पर बात करने के लिए तैयार हैं, यदि कोई किसान संगठन कृषि  कानून के प्रावधानों पर सरकार से बातचीत करना चाहता है तो हम उनका तह दिल से स्वागत करेंगे, लेकिन किसानों का कहना है जब तक कानून वापसी नहीं, तब तक घर वापसी नही