जयपुर. प्रदेश में चल रही सियासी उठापटक के बीच स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बीच ट्विटर पर जमकर नोकझोंक हुई. दोनों ने एक दूसरे पर जहां खूब सियासी तंज कसे तो वहीं एक-दूसरे को नसीहतें भी दी. दरअसल, सबसे पहले चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा का एक बयान आया. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं को छपास का रोग और सुर्खियों में रहने की आदत है. उन्होंने उप नेता प्रतिपक्ष पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजेन्द्र राठौड़ न तीन में न ही तेरह में, न वसुंधरा खेमे में और ना ही सतीश पूनिया के खेमे में. इसके बाद दोनों में लंबा ट्वीट वॉर चला और दोनों एक-दूसरे पर वार-पलटवार करते रहे.

इस दौरान रघु शर्मा के इस बयान का राजेंद्र राठौड़ ने ट्विटर पर पलटवार करते हुए लिखा- चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा जी, आपने ठीक कहा ना मैं 3 में हूं और ना ही 13 में मैं भाजपा कार्यकर्ता के रूप में जनता के अपार प्रेम और आशीर्वाद की बदौलत लगातार सातवीं बार विधायक निर्वाचित हुआ हूं. मगर मेरे साथ राजनीतिक सफर शुरू करने वाले मित्र आपकी कार्यशैली तो ऐसी रही है कि आप 7 चुनाव लड़कर मात्र 2 बार ही विधानसभा में पहुंच पाए.

चिकित्सा मंत्री का फिर पटलवार:
राजेन्द्र राठौड़ का यह ट्वीट सामने आने पर चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने फिर ट्वीट कर उन पर पलटवार किया. रघु शर्मा ने लिखा, राजेन्द्र राठौड़ जी, पहला चुनाव आपने 1980 में जनता दल से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. जगदीश प्रसाद माथुर को हराने के लिए लड़ा. जिसमें आपको मात्र 2000 वोट आए. उसके बाद 1985 में ही जनता दल से ही चूरु से चुनाव लड़ा और आपकी ज़मानत जब्त हो गई. उसके बाद हुए चुनाव में आप जनता दल से जीते और पार्टी का विघटन करके आप भाजपा में चले गए. मैं तीन बार चुनाव जीता जिसमें एक अजमेर लोकसभा का भी चुनाव शामिल है. जिसमें आठों विधानसभाओं से भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा. आप भी प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रहे हो और जब व्यवस्थाएं आपसे नहीं संभली और अधिकारी आपकी नहीं सुनते थे, तो आपको कोटा में कहना पड़ा कि मैं शर्मिंदा हूं कि मैं राज्य का चिकित्सा मंत्री हूँ, वह बात भी आपको नहीं भूलनी चाहिए.

शेर-ओ-शायरी के जरिए साधा निशाना:
राजेंद्र राठौड़ ने रघु शर्मा के जवाब पर फिर पलटवार करते हुए शायराना अंदाज में लिखा- ना इतराओ इतना, बुलंदियों को छूकर, वक्त के सिकन्दर पहले भी कई हुए हैं,जहां होते थे कभी शहंशाह के महल,देखे हैं वहीं, अब उनके मकबरे बने हुए हैं. आपकी याददाश्त शायद कमजोर हो गई. 1985 के चुनावों में मैं चूरू से लगभग 5000 वोटों से हारकर दूसरे नंबर पर था. और उसके बाद कभी हार नहीं देखी आगे राठौड़ ने लिखा- हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या, तेल देखो, तेल की धार देखो। समय का चक्र घूम रहा है, अगले चुनाव में ढाई साल बाद फिर किसी मोड पर चुनाव का इतिहास लिखा जाएगा। अग्रिम शुभकामनाएं मेरे छात्र जीवन के मित्र