Jeet Mal Kumawat@राजस्‍थान में जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर (Soumya Gurjar) को निलंबित करने के मामले में बीजेपी ने प्रदेश भर में सड़कों पर उतर कर राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है. इस दौरान राजधानी जयपुर में बीजेपी मुख्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे. यही नहीं, इस मामले में भाजपा ने राज्यपाल को ज्ञापन भी दिया है.

महापौर सौम्या गुर्जर के निलंबन के बाद से ही बीजेपी नेता कांग्रेस सरकार पर आक्रामक अंदाज में हमले कर रहे हैं. राजधानी में जयपुर शहर बीजेपी की तरफ से सभी ढाई सौ वार्ड में महापौर को हटाने के मामले में विरोध प्रदर्शन किए गए. वहीं, आज बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के आवाहन पर प्रदेश के सभी मंडल स्तर तक इस मामले को उठाया गया.

भाजपा के बड़े नेता उतरे मैदान में

इस दौरान भाजपा मुख्यालय के बाहर प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, संगठन मंत्री चंद्रशेखर, विधायक राजेंद्र राठौड़, वासुदेव देवनानी, जयपुर प्रभारी अरुण चतुर्वेदी समेत कई बीजेपी कार्यकर्ता और पदाधिकारी हाथों में काले झंडे लेकर नारेबाजी करते नजर आए. सरकार के खिलाफ आलोकतांत्रिक निर्णय करार देने के विरोध में भाजपा नेताओं ने काफी देर तक नारे लगाए. इस दौरान बीजेपी नेताओं ने न्‍यूज़ 18 से खास बातचीत में कहा कि अब सड़क से लेकर अदालत तक इस आलोकतांत्रिक निर्णय के खिलाफ पार्टी अपनी लड़ाई जारी रखेगी. बीजेपी नेताओं का कहना था कि सरकार को यह निर्णय वापस लेना होगा.
राज्यपाल कलराज मिश्र को सौंपा ज्ञापन

बीजेपी नेताओं का यह प्रतिनिधिमंडल विरोध प्रदर्शन के बाद राजभवन की ओर पहुंचा, जहां 11 सदस्य प्रतिनिधि मंडल ने इस मामले को लेकर राज्यपाल कलराज मिश्र को अपना ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन देने के बाद नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि इस मामले को लेकर वे राज्यपाल को अवगत कराने गए थे. दूसरी तरफ बीजेपी की शील धाबाई को कार्यकारी महापौर बनाने के मामले को लेकर कहना था कि सवाल पार्टी का नहीं है, चुने हुए प्रतिनिधि को जिस तरीके से बेदखल किया गया है उससे यह अलोकतांत्रिक है.

बता दें कि जयपुर नगर निगम आयुक्त से दुर्व्यवहार करने के आरोप के मामले में सौम्या गुर्जर को निलंबित किया गया था. हालांकि कांग्रेस ने नया दांव खेलते हुए बीजेपी की पार्षद शील धाबाई को ही कार्यकारी महापौर नियुक्त कर दिया है, इसलिए पार्टी को विरोध का और बड़ा अवसर तो नहीं मिल पाया, लेकिन सौम्या गुर्जर के निलंबन के मामले को लेकर पार्टी अब सड़क से सदन के आंदोलन की तैयारी में जुटी है.