जयपुर. प्रदेश के बीकानेर जिले के रामदेव मंदिर के पास मोहल्ला चुंगरानं की रहने वाली साढ़े छह माह की नूर फातिमा ने इलाज के अभाव में इस दुनिया को अलविदा कह दिया. नूर फातिमा को बीकानेर के एक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.

नूर फातिमा को ‘एसएमएन’ नाम की बीमारी थी जो ज़ोलगेन्स्मा (Zolgensma) का इंजेक्शन लगाने से ही ठीक हो सकती है. इसका एक इंजेक्शन 16 करोड़ रुपये में मिलता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मांगी थी मदद:
पैसों का इंतजाम न होने पाने और इलाज के अभाव में बच्ची ने मंगलवार सुबह इस दुनिया को अलविदा कह दिया. हालांकि कई सामाजिक संगठनों की तरफ से नूर फातिमा के लिए पैसों की मदद की गई.बता दें कि नूर फातिमा को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ी मांग 16 करोड़ के इंजेक्शन को लेकर की गई थी, लेकिन वहां से भी मदद नहीं मिल सकी.

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ जेनेटिक रोग:
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक दुर्लभ जेनेटिक रोग है, जो न्यूरो मस्कुलर जंक्शन्स को प्रभावित करता है. ये टाइप 1 और टाइप 2, दो तरह की होती है. इसमें टाइप 1 अधिक गंभीर है. ये रोग सर्वाइवल मोटर न्यूरॉन (SMN1) जीन में जेनेटिक गड़बड़ी की वजह से होता है. ये जीन एसएमएन प्रोटीन को एनकोड करता है जो मोटर न्यूरॉन्स के सर्वाइव करने के लिए जरूरी होता है.