जयपुर. देश में कोरोना की पहली लहर के बाद बरती गई लापरवाही के कारण दूसरी लहर ने जमकर कहर बरपाया लेकिन फिर भी प्रदेश सरकार के जिम्मेदार सबक लेने को तैयार नहीं हैं. जानकारी के मुताबिक राजस्‍थान में जारी सियासी उठापटक के बीच बदली हुई परिस्थितियों में अब शेष रहे 12 जिलों के जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव होना तय माना जा रहा है. संभवत: चुनाव आयोग जुलाई या अगस्त महीने के प्रारंभ में चुनाव कार्यक्रम जारी कर सकता है. हालांकि, कोरोना के कारण राज्य सरकार अभी तक चुनाव का विरोध करती रही है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि बदलते सियासी समीकरणों के चलते अब राज्य सरकार चुनाव करवाने का विरोध नहीं करेगी.

प्रदेश के बदले सियासी हालत चुनाव तय:
राज्य के ग्रामीण एवं पंचायती राज विभाग ने राज्य निर्वाचन आयोग की चिट्ठी के बाद प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स को 25 जून तक पुनः आरक्षण की लॉटरी निकालने के निर्देश दिए हैं. वही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव न कराने का अनुरोध कर चुके हैं, दूसरी लहर से पहले हुए चुनावों के दौरान आमजन को सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग और फेस मास्क सहित अन्य जरूरी एहतियात की सलाह दी थी. खुद पूरी सरकार और सभी राजनीतिक दलों के नेता चुनाव प्रचार में सोशल डिस्टेंसिंग की अवहेलना करते नजर आये. जनता में इसको लेकर किरकिरी भी हुई लेकिन अब प्रदेश में सियासी हालात बदल गए हैं.

बीजेपी प्रतिपक्ष नेता ने साधा निशाना:
राजस्थान में शेष पंचायत चुनाओं को लेकर बीजेपी उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा की बंगाल के चुनावों पर केंद्र पर मुख्यमंत्री ने खूब आलोचना की थी वहीं दूसरी ओर राज्य में खुद की सरकार पर आए संकट के बादल और सियासी घमासान का समाधान पंचायत चुनावों से चाहते हैं. वह भी तब, जबकि कोरोना की दूसरी लहर अभी तक गई नही है. और तीसरी लहर की आशंका बनी हुई है

इन जिलों में होने है चुनाव:
राज्य के अलवर, बारां, दौसा, भरतपुर, धौलपुर, जयपुर, जोधपुर, करौली, कोटा, सवाई माधोपुर, सिरोही और श्रीगंगानगर के जिला परिषद एवं पंचायती समिति सदस्यों के चुनाव होने हैं. जनवरी 2020 में होने वाले इन चुनावों के लिये राज्य सरकार की ओर से पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन बाबत जारी की गई अधिसूचनाओ को कोर्ट में चुनौती देने कारण चुनाव नहीं हो सके थे. इसके बाद कोविड- 19 के कारण चुनाव नहीं हो सके थे.