नई दिल्ली : कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून की गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली गाजीपुर बॉर्डर समेत राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर चल रहे किसानों के आंदोलन को सात महीने पूरे होने जा रहे हैं. किसान नेता कई बार साफ कर चुके हैं कि जब तक तीनों कृषि कानूनों की वापसी नहीं होगी तब तक किसानों की गांव को वापसी भी नहीं होगी.

सरहद पर टैंक, खेत में ट्रैक्टर, युवाओं के हाथ में ट्विटर राकेश टिकैत ने ट्वीट करते हुए कहा कि, ‘सरकार मानने वाली नहीं है। इलाज तो करना पड़ेगा. ट्रैक्टरों के साथ अपनी तैयारी रखो. जमीन बचाने के लिए आंदोलन तेज करना होगा. ये पहली बार नहीं है जब राकेश टिकैत ने सरकार को चेतावनी दी है, इससे पहले भी अलग अलग मंचो से सरकार से कानून वापसी की मांग कर चुके हैं. लेकिन टिकैत का इस वक्त इस तरह की बात कहना इसलिए मायने रखता है, क्योंकि यूपी, उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव नजदीक हैं.

राकेश टिकैत ने 19 जून को भी एक ट्वीट किया था, जिसमें लिखा गया कि, ‘केन्द्र सरकार ये गलतफहमी अपने दिमाग से निकाल दे कि किसान वापस जाएंगे, किसान तभी वापस जाएंगे, जब मांगें पूरी हो जाएंगी. हमारी मांग है कि तीनों कानून रद्द हों. एमएसपी पर कानून बने. बता दें कि कोरोना संकट के दौरान पिछले 200 से ज्यादा दिनों से दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है. किसान नेता आंदोलन के शुरुआती दौर में कह चुके हैं. किसान सरकार से कृषि कानूनों में संशोधन नहीं चाहता, बल्कि कृषि कानूनों की वापसी चाहता है, और जब तक कानूनों को वापस नहीं लिया जाता तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा.