जयपुर. माह-ए-इबादत रमजान का आगाज हो चुका है. लगातार दूसरे साल कोरोना महामारी के मुश्किल वक्त में ये मौका आया है. राजधानी जयपुर में मस्जिदें नमाजियों से गुलजार नजर आ रही है. वही लोग कुरान की तिलावत करने के साथ ही इस महामारी के खत्म होने की दुआ भी करते हुए नजर आ रहे हैं. आज बुधवार सुबह तड़के 4:35 पर मुस्लिम समाज के लोगों ने पहला रोजा रखा और शाम को 6:00 बजकर 53 मिनट पर रोजा खुलेगा. आज के दौरान बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने के लिए जामा मस्जिद पहुंचे. इमाम मौलाना मोहम्मद कलीम रज़ा नूरी ने बताया की पवित्र रमजान महीने में जो मुसाफिर हो या फिर बीमार हो उस को छोड़कर सभी लोगों पर रोजे रखना जरूरी बताया गया है.उन्होंने कहा कि इस मुकद्दस महीने में हम खुदा से दुआ करते हैं, कि जल्द से जल्द कोरोना महामारी खत्म हो

खुद पैगंबर मोहम्मद साहब के जमाने में ताऊन नामक वबा (महामारी) फैली थी, जिसका रूप कोरोना जैसा ही था. तब मोहम्मद साहब ने यह तदबीर फरमाई कि जहां बीमारी फैली हुई हो, वहां दूसरे लोग ना जाएं और वहां के लोग दूसरी जगह ना आएं. आज के हालात में यह तदबीर सटीक है. बेहद जरूरी है कि मस्जिदाें में भीड़ ना हाे. दूरी रखी जाए अल्लाह इबादत देखता है न कि जगह.

27वीं रात शब-ए-क़द्र को कुरान नाजिल हुआ:
मुसलमानों के विश्वास के अनुसार इस महीने की 27वीं रात शब-ए-क़द्र को कुरान का नुज़ूल (अवतरण) हुआ. इस लिये, इस महीने में क़ुरान को अधिक पढ़ना पुण्यकार्य माना जाता है. तरावीह की नमाज़ में महीना भर कुरान की तिलावत यानी (कुरान का पठन) किया जाता है. जिस इंसान को कुरान पढ़ना नहीं आता है वो इस पाक महीने में तरावीह की नमाज़ में कुरान सुनकर सवाब हासिल करता है.

रमजान का पवित्र महीना 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है:
रमजान का महीना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है. इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग उपवास रखते हैं. उपवास को अरबी में “सौम” कहा जाता है, इसलिए इस मास को अरबी में माह-ए-सियाम भी कहते हैं. फ़ारसी में उपवास को रोज़ा कहते हैं. भारत के मुसलिम समुदाय पर फ़ारसी प्रभाव ज़्यादा होने के कारण उपवास को फ़ारसी शब्द ही उपयोग किया जाता है.

सुरक्षित रमजान की गाइड-लाइन:

संक्रमित हैं या गंभीर बीमारी है तो रोजे के लिए डॉक्टर से सलाह लें.

किसी से हाथ न मिलाएं, बल्कि दिल पर हाथ रख उसे दुआएं दें.

संक्रमण से बचते हुए गरीबों को खाना-इफ्तारी देते रहें.

घर पर ही इबादत पर जोर दें. बच्चों को भी डिसिप्लिन सिखाएं.

न इफ्तार पार्टी करें ना किसी की दी हुई इफ्तार पार्टी में जाएं. घर पर रहें.

नमाज के दौरान दूरी बनाएं रखें, मस्जिदों में बेवजह भीड़ न बढ़ाएं.

नमाज़ के दौरान मास्क जरूर लगाए.